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GANESH CHATURTHI
Lord Ganesha is considered as the supreme God among all Hindu Gods and is the first to be worshiped
during any auspicious event.The festival which is celebrated in honor of the god Ganesha is “Ganesh Chaturthi”. Although Ganesha Puja can be done during Pratahkala, Madhyahnakala and Sayankala but Madhyahnakala  is preferred during Ganesha Chaturthi Puja. Madhyahnakala Puja time for Ganesha Puja can be known at Ganesha Chaturthi Puja Muhurat.
Benifits of Ganesh Puja 
1. The worship of Lord Ganesh brings good fortune to one’s personal and professional life.
2. This pooja helps one become wise and knowledgeable.
3. The souls of the worshippers are purified by the grace of Lord Ganesh.
4. Financial difficulties are resolved easily by performing Ganesh pooja and one can gain great success in their business.
5. Helps to control the influence of the Rajas and Tamas Gunas of the worshippers.
6. Activates the Adnya Chakra of the devotee.
7. Lord Ganesh is worshipped before the pooja of any other God and before starting any new professional ventures.
8. Ganesh pooja during the auspicious occasion of Ganesh Chaturthi increases the effect of this pooja manifold.
 
Importance of Ganesh Puja
This festival is celebrated with extreme vigour and enthusiasm especially in western India, specifically in Maharashtra. Here the celebration lasts for ten days and the deity of Ganesha is kept for all these ten days even by common people of Maharashtra. Worship of Lord Ganesha was started by Chatrapati Shivaji Maharaj and this was done as a non-community affair.
Lord Ganesha is an elephant headed God and is worshipped prior to all Hindu Gods. His name is repeated before starting any work and is believed to be very fortunate and propitious. People even keep the idol or image of Lord Ganesha on their doors to let positive vibrations enter the house. The image of God is imprinted on invitation cards for weddings and the presence of the Lord is solicited on the occasion by worshipping the Lord first.
Lord Ganesha is considered as the God of power and wisdom. There are various stories associated that show how cleverly and coolly he used to deal with complicated matters. There are several names given to the Lord after all his good doings like Gajanana, Dhoomraketu, Ekdanta, Vakratunda, Sidhdhi Vinayaka and many more.
RAKSHABANDHAN

भारत अतुल्य है। यह त्योहारों, उत्सवों की धरती है। मनुष्य के आपसी संबंधों और जुड़ाव को भी त्योहार के जरिए प्रकट किया जाता है। रक्षा बंधन भी एक ऐसा ही त्योहार है, जो भाई और बहन के बीच बिना शर्त के प्रेम को प्रकट करता है। इसे राखी पूर्णिमा के तौर पर भी जाना जाता है। यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के सावन माह में पूर्ण चंद्र के दिन होता है, जिसे पूर्णिमा कहा जाता है। राखी एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार है। इसे पूरे देश में मनाया जाता है। राज्य, जाति और धर्म कोई भी हो, हर व्यक्ति इसे मनाता है। राखी मॉरीशस और नेपाल में भी मनाई जाती है।

रक्षा बंधन का शाब्दिक अर्थ हुआ रक्षा का बंधन। भाई और बहन इस दिन एक-दूसरे के प्रति अपने नैसर्गिक प्रेम को प्रदर्शित करते हैं। भाई अपनी बहन को हर मुश्किल परिस्थिति में रक्षा करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचाने का वचन देता है। बहनें अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं।
रक्षा बंधन का इतिहास
राखी से कई कहानियां जुड़ी हैं। कई लोकप्रिय कथाओं में कुछ चुनिंदा इस तरह हैः

महान ऐतिहासिक ग्रंथ महाभारत के मुताबिक एक बार भगवान कृष्ण, पांडवों के साथ पतंग उड़ा रहे थे। उस समय धागे की वजह से उनकी अंगुली कट गई। तब द्रोपदी ने बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी अंगुली पर बांधा था। भगवान कृष्ण द्रोपदी के इस प्रेम से भावुक हो गए और उन्होंने आजीवन सुरक्षा का वचन दिया। यह माना जाता है कि चीर हरण के वक्त जब कौरव राजसभा में द्रोपदी की साड़ी उतार रहे थे, तब कृष्ण ने उस छोटे से कपड़े को इतना बड़ा बना दिया था कि कौरव उसे खोल नहीं पाए।
भाई और बहन के प्रतीक रक्षा बंधन से जुड़ी एक अन्य रोचक कहानी है, मौत के देवता भगवान यम और यमुना नदी की। पौराणिक कथाओं के मुताबिक यमुना ने एक बार भगवान यम की कलाई पर धागा बांधा था। वह बहन के तौर पर भाई के प्रति अपने प्रेम का इजहार करना चाहती थी। भगवान यम इस बात से इतने प्रभावित हुए कि यमुना की सुरक्षा का वचन देने के साथ ही उन्होंने अमरता का वरदान भी दे दिया। साथ ही उन्होंने यह भी वचन दिया कि जो भाई अपनी बहन की मदद करेगा, उसे वह लंबी आयु का वरदान देंगे।
यह भी माना जाता है कि भगवान गणेश के बेटे शुभ और लाभ एक बहन चाहते थे। तब भगवान गणेश ने यज्ञ वेदी से संतोषी मां का आह्वान किया। रक्षा बंधन को शुभ, लाभ और संतोषी मां के दिव्य रिश्ते की याद में भी मनाया जाता है।

राखी के सांकेतिक रंग

राखी से पीले, नारंगी और लाल रंग का जुड़ाव ज्यादा है। यह रंग है भी प्रेम और वफादारी के प्रतीक।
रबींद्र नाथ ठाकुर ने इन रंगों में सफेद भी जोड़ा था। सफेद रंग भाई-बहनों के आपसी रिश्ते को और मजबूत बताते हुए खून के रिश्ते को दोस्ती में बदलता है।

समारोह

राखी को बड़े उत्साह के साथ इस तरह मनाया जाता हैः
बहनें अपने भाइयों के लिए पसंदीदा राखियां खरीदने के लिए काफी पहले से तैयारी करती हैं। कई बहनें अपने से दूर रह रहे भाइयों को पोस्ट के जरिए राखी भेजती हैं। भाई भी बहनों के लिए उपहार तलाशना शुरू कर देते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनके पास कितने पैसे हैं और उनका बजट क्या है।

घर के देवी-देवताओं की पूजा करने के बाद बहनें अपने भाई की आरती उतारती हैं। तिलक और चावल माथे पर लगाती हैं। बदले में भाई जिंदगीभर सुरक्षा का वचन देने के साथ ही उपहार भी बहनों को देते हैं।
आजादी के बाद रवींद्र नाथ ठाकुर ने शांति निकेतन में राखी महोत्सव का आयोजन किया। वे पूरे विश्व में बंधुत्व और सह-अस्तित्व की भावना जगाना चाहते थे। यहां राखी मानवीय संबंधों में सद्भाव का प्रतीक है।
सशस्त्र सेनाओं को भी इस दिन नहीं भूलाया जा सकता। वर्दी वाले यह जवान हमारी सीमाओं की रक्षा करते हैं ताकि हम यहां आराम से सुरक्षित रह सके। इस दिन सीमाई इलाकों के पास रहने वाले लोग बड़े पैमाने पर सशस्त्र सेनाओं से मिलने जाते हैं। सिपाहियों की कलाइयों पर राखी बांधते हैं।

राखी की आधुनिक अवधारणा

रक्षा बंधन अब खून के रिश्तों तक सीमित नहीं है, जो भाई और बहन के बीच ही रहे। आज, बहनें भी एक-दूसरे को राखी बांधकर एक-दूसरे को जीवनभर प्रेम और रक्षा करने का वचन देती हैं। दोस्त भी इस त्योहार को मनाने लगे हैं। आपसी रिश्ते को मजबूती देने और एक-दूसरे के प्रति अपने अहसास बताने के लिए। आज रक्षा बंधन एक व्यापक नजरिये को प्रस्तुत करता है। जीवनभर नैतिक, सांस्कृतिक और अध्यात्मिक मूल्य भी इसमें शामिल हैं।

कोई भी रिश्ता किसी खास दिन या उत्सव का मोहताज नहीं होता। लेकिन त्योहार और खास दिन ही हमारी रोजमर्रा की बोरियत भरी जिंदगी से दूर करते हुए हमें आपसी रिश्तों और प्रेम के प्रतीक इन त्योहारों को मनाने को प्रेरित करते हैं। हम यहां हर एक को विश्व बंधुत्व और प्रेम को अभिव्यक्त करना चाहते हैं। हैप्पी रक्षा बंधन!!!

Thread for the Protection of Trees

एक धागा वृ्क्षों की रक्षा के लिये

आज जब हम रक्षा बंधन पर्व को एक नये रुप में मनाने की बात करते है, तो हमें समाज, परिवार और देश से भी परे आज जिसे बचाने की जरुरत है, वह सृ्ष्टि है, राखी के इस पावन पर्व पर हम सभी को एक जुड होकर यह संकल्प लें, राखी के दिन एक स्नेह की डोर एक वृक्ष को बांधे और उस वृ्क्ष की रक्षा का जिम्मेदारी अपने पूरे लें. वृ्क्षों को देवता मानकर पूजन करने मे मानव जाति का स्वार्थ निहित होता है. जो प्रकृ्ति आदिकाल से हमें निस्वार्थ भाव से केवल देती ही आ रही है, उसकी रक्षा के लिये भी हमें इस दिन कुछ करना चाहिए.

 

" हम्रारे शास्त्रों में कई जगह यह उल्लेखित है कि 
जो मानव वृ्क्षों को बचाता है, वृक्षों को लगाता है, 
वह दीर्घकाल तक स्वर्ग लोक में निवास पाकर 
भगवन इन्द्र के समान सुख भोगता है. " 

पेड -पौध बिना किसी भेदभाव के सभी प्रकार के वातावरण में स्वयं को अनुकुल रखते हुए, मनुष्य जाति को जीवन दे रहे होते है. इस धरा को बचाने के लिये राखी के दिन वृक्षों की रक्षा का संकल्प लेना, बेहद जरूरी हो गया है. आईये हम सब मिलकर राखी का एक धागा बांधकर एक वृ्क्ष की रक्षा का वचन लें.

Krishna Janmashtami


Devotees, who observe fast on Janmashtami, should have only single meal a day before Janmashtami. On fasting day, devotees take Sankalpa to observe a day long fast and to break it on the next day when both Rohini Nakshatra and Ashtami Tithi are over. Some devotees break the fast when either Rohini Nakshatra or Ashtami Tithi is over. Sankalpa is taken after finishing morning rituals and the day long fasting begins with Sankalpa.

The time to perform Krishna Puja is during Nishita Kala which is the midnight as per Vedic time-keeping. Devotees perform detailed ritualistic Puja during midnight and it involves all sixteen steps which are part of Shodashopachara (षोडशोपचार) Puja Vidhi. Please check Krishna Janmashtami Puja Vidhi which lists all Puja steps for Janmashtami along with Vedic Mantra to perform the Puja.

Fasting Rules on Krishna Janmashtami

No grains should be consumed during Janmashtami fasting until the fast is broken on next day after Sunrise. All rules followed during Ekadashi fasting should be followed during Janmashtami fasting also.

Parana which means breaking the fast should be done at an appropriate time. For Krishna Janmashtami fasting, Parana is done on next day after Sunrise when Ashtami Tithi and Rohini Nakshatra are over. If Ashtami Tithi and Rohini Nakshatra don't get over before Sunset then fast can be broken during day time when either Ashtami Tithi or Rohini Nakshatra is over. When neither Ashtami Tithi nor Rohini Nakshatra is over before Sunset or even Hindu Midnight (also known as Nishita Time) one should wait to get them over before breaking the fast.

Depending on end timing of Ashtami Tithi and Rohini Nakshatra fasting on Krishna Janmashtami might continue for two complete days. Devotees who are not able to follow two days fasting might break the fast on next day after Sunrise. It has been suggested by Hindu religious text Dharmasindhu.

Krishna Janmashtami is also known as KrishnashtamiGokulashtami, Ashtami Rohini, Srikrishna Jayanti and Sree Jayanthi.

About Two Krishna Janmashtami Dates

Most of the time, Krishna Janmashtami is listed on two consecutive days. The first one is for Smarta Sampradaya and other one is for Vaishanava Sampradaya. Vaishanava Sampradaya date is the latter one. A single date for Janmashtami means that both Sampradaya would observe Janmashtami on the same date.

However many people will notice unanimity in North India on choosing the day to celebrate Krishna Janmashtami. The reason behind this unanimity is the institution of ISKCON. The International Society for Krishna Consciousness, commonly known as ISKCON is founded on the principles of Vaishnava traditions and most followers of the ISKCON are the followers of Vaishnavism.

With all due respect, ISKCON is one of the most commercialized and global religious institutions which spend money and resources to promote ISKCON brand and ISKCON culture. In North India most people observe Janmashtami on the day chosen by ISKCON. Many people who are not the followers of Vaishnavism don't even understand that ISKCON traditions are different and the most appropriate day to observe Janmashtami fasting might not be same as that of ISKCON.

Smarta followers who understand the difference between Smarta and Vaishnava sectarian don't follow ISKCON date to observe Janmashtami fasting. Unfortunately ISKCON date to observe Janmashtami is unanimously followed in Braj region and most common people who just follow the buzz observe it on the date followed by the ISKCON.

People who are not the followers of Vaishnavism are followers of Smartism. Hindu religious texts like Dharmasindhu and Nirnaysindhu have well defined rules to decide Janmashtami day and those rules should be followed to decide Janmashtami day if one is not the follower of Vaishnava Sampradaya. Ekadashi fasting is one of the good examples to understand this difference. Rules to observe Ekadashis' fasting are also different for Smarta and Vaishnava communities. However there is more awareness about different Ekadashi rules followed by Vaishnava sectarian. Not only Ekadashis, Vaishnava fasting day for Janmashtami and Rama Navami might be one day later than Smarta fasting day.

The followers of Vaishnavism give preference to Ashtami Tithi and Rohini Nakshatra. The followers of Vaishnavism never observe Janmashtami on Saptami Tithi. Janmashtami day according to Vaishnava rules always fall on Ashtami or Navami Tithi on Hindu calendar.

However rules followed by Smartism to decide Janmashtami day are more complex. The preference is given to Nishita or Hindu midnight. The preference is given to the day, either Saptami Tithi or Ashtami Tithi, when Ashtami Tithi prevails during Nishita and further rules are added to include Rohini Nakshatra. The final consideration is given to the day which has the most auspicious combination of Ashtami Tithi and Rohini Nakshatra during Nishita time. Janmashtami day according to Smarta rules always fall on Saptami or Ashtami Tithi on Hindu calendar.

रुद्राभिषेक

क्या है रुद्राभिषेक ?

अभिषेक शब्द का शाब्दिक अर्थ है – स्नान (Bath) करना अथवा कराना। रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान रुद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रुद्र के मंत्रों के द्वारा अभिषेक करना। यह पवित्र-स्नान रुद्ररूप शिव को कराया जाता है। वर्तमान समय में अभिषेक रुद्राभिषेक के रुप में ही विश्रुत है। अभिषेक के कई रूप तथा प्रकार होते हैं। शिव जी को प्रसंन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है रुद्राभिषेक करना अथवा श्रेष्ठ ब्राह्मण विद्वानों के द्वारा कराना। वैसे भी अपनी जटा में गंगा को धारण करने से भगवान शिव को जलधाराप्रिय माना गया है।

 

रुद्राभिषेक क्यों करते हैं?

रुद्राष्टाध्यायी के अनुसार शिव ही रूद्र हैं और रुद्र ही शिव है। रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: अर्थात रूद्र रूप में प्रतिष्ठित शिव हमारे सभी दु:खों को शीघ्र ही समाप्त कर देते हैं। वस्तुतः जो दुःख हम भोगते है उसका कारण हम सब स्वयं ही है हमारे द्वारा जाने अनजाने में किये गए प्रकृति विरुद्ध आचरण के परिणाम स्वरूप ही हम दुःख भोगते हैं।

 

रुद्राभिषेक का आरम्भ कैसे हुआ ?

प्रचलित कथा के अनुसार भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई। ब्रह्माजी जबअपने जन्म का कारण जानने के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे तो उन्होंने ब्रह्मा की उत्पत्ति का रहस्य बताया और यह भी कहा कि मेरे कारण ही आपकी उत्पत्ति हुई है। परन्तु ब्रह्माजी यह मानने के लिए तैयार नहीं हुए और दोनों में भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध से नाराज भगवान रुद्र लिंग रूप में प्रकट हुए। इस लिंग का आदि अन्त जब ब्रह्मा और विष्णु को कहीं पता नहीं चला तो हार मान लिया और लिंग का अभिषेक किया, जिससे भगवान प्रसन्न हुए। कहा जाता है कि यहीं से रुद्राभिषेक का आरम्भ हुआ।

श्रावण मास रुद्राभिषेक का महत्व

सावन के महीने को शिव आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है. क्योंकि ये महीना देवाधिदेव महादेव को बहुत प्रिय है. सावन का महीना ऐसा महीना है, जिसमें छह ऋतुओं का समावेश होता है. और शिवधाम पर इसका महत्व सबसे ज्यादा होता है. कहा जाता है कि शिव को प्रसन्न करने का सर्वोच्च उपाय रुद्राभिषेक ही है. साक्षात देवी और देवता भी शिव कृपा के लिए शिव-शक्ति के ज्योति स्वरूप का रुद्राभिषेक ही करते हैं.

भारतीय संस्कृति में वेदों का इतना महत्व है तथा इनके ही श्लोकों, सूक्तों से पूजा, यज्ञ, अभिषेक आदि किया जाता है। शिव से ही सब है तथा सब में शिव का वास है, शिव, महादेव, हरि, विष्णु, ब्रह्मा, रुद्र, नीलकंठ आदि सब ब्रह्म के पर्यायवाची हैं। रुद्र अर्थात् ‘रुत्’ और रुत् अर्थात् जो दु:खों को नष्ट करे, वही रुद्र है, रुतं–दु:खं, द्रावयति–नाशयति इति रुद्र:।

“शिव-भक्तों को यजुर्वेदविहितविधान से रुद्राभिषेक करना चाहिए।” रुद्राभिषेक से समस्त कार्य सिद्ध होते हैं।अंसभवभी संभव हो जाता है।प्रतिकूल ग्रहस्थिति अथवा अशुभ ग्रहदशा से उत्पन्न होने वाले अरिष्ट का शमन होता है। भगवान शिव चंद्रमा को अपने सिर पर धारण करते हैं । चंद्रमा ज्योतिष मे मन का कारक है । किसी भी प्रकार के मानसिक समस्या को दूर करने मे रुद्रभिषेक सहायक सिद्ध होता है। चंद्रमा को जब क्षय रोग हुआ था तो सप्तऋषि ने रुद्रभिषेक किया था । चंद्रमा के पीड़ित होने से क्षय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। यह ज्योतिषीय नियम है की कुंडली मे अगर चंद्रमा पाप गृह से पीड़ित हो तो क्षय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर कोई इस प्रकार की बीमारी से पीड़ित है तो रुद्राभिषेक करवाना लाभप्रद होता है। गंभीर किस्म के बीमारियों को दूर करने हेतु एवं उनके होने से बचने हेतु रुद्रभिषेक करवाना लाभप्रद होता है।

- रुद्राभिषेक सद्बुद्धि सद्विचार और सत्कर्म की ओर पृवृत्ति होती है | 
- रुद्राभिषेक से मानव की आत्मशक्ति, ज्ञानशक्ति और मंत्रशक्ति जागृत होती है |
- रुद्राभिषेक से मानव जीवन सात्त्विक और मंगलमय बनता है | 
- रुद्राभिषेक से अंतःकरण की अपवित्रता एवं कुसंस्कारो के निवारण के उपरांत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन पुरुषार्थचतुस्त्य की प्राप्ति होती है | 
- रुद्राभिषेक से असाध्य कार्य भी साध्य हो जाते हैं, सर्वदा सर्वत्र विजय प्राप्त होती है, अमंगलों का नाश होता है, सत्रु मित्रवत हो जाता है | 
- रुद्राभिषेक से मानव आरोग्य, विद्या , कीर्ति, पराक्रम, धन-धन्य, पुत्र-पौत्रादि अनेकविध ऐश्वर्यों को सहज ही प्राप्त कर लेता है | 

अतः प्रत्येक प्राणी को घर परिवार में सुख-शान्ति, स्वस्थता, व्यापार लाभ, पद प्रतिष्ठा प्राप्ति हेतु वर्ष के श्रावण मास में विशेषकर श्रावण के सोमवार को घर अथवा शिवालय में शिव अर्चना के साथ साथ योग्य पण्डितों के द्वारा रुद्राभिषेक अवश्य करवाना चाहिए ।

CONSULTATION FOR REMEDIES ON MONEY PROBLEMS & FINANCES

(As per the age old vedic & modern remedial astrology, the client is provided with Precise Remedies & Solutions for their Money & Financial Problems & Its Related Issues.It will include the various types of remedies, upaye, right yogas and nakshatras to do that upaye with day, date and time slot, best time of the year which will give you some relief from this problem, which metal is to be used, best color & number to be used for that year for relief (as per astro numerology & astro color therapy), mantras to be enchanted, power remedy, Vastu Remedy for this problem & daan-punya-samarpan samagri with day-date-time of daan etc.)

Your financial status is a deciding factor of your pleasure or pain. Achievement of financial stability is a life goal for every individual. This report indicates the amount of wealth you will acquire and money you will make as precisely as possible. It is an assessment of hay days and dark days. This report highlights your potential sources of income such as – business, profession, income through art and literacy, games and sports, counseling as well as windfalls, lottery, inheritance, money through dubious practices etc. This report deals with the elixir and nectar of life science i.e Money and Finance.

GET YOUR HEALTH REPORT

Health is wealth but this wealth is not easy to come by. Sometimes it so happens that certain health concerns do not show up easily and remains undetected for years. However, a proper health report by Sri Maa Yog Yogeshwari Yati can come to your rescue. She will analyze your horoscope thoroughly and highlight the health concerns that might surprise or a timeline in which you must look after yourself strictly.

This report will also answer the following questions: 
1. What would be the strength of the horoscope on the Health front?
2. What kinds of health problems are foreseen, Chronic or Short Term?
3. Sensitive body parts with the betterment guidelines and remedies.

Consultation for Remedies on Money Problems & Finances

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